Wednesday, September 14, 2016

गरीबी महापाप............

 
आज में अपने देश की, ग़रीब लोगों की परिस्थित को देखता  हूं तो बहुत हताश हो जाता हू। क्या पत्ता लोगो की इनसानीयत क्या मरगी ? क़्या लोग अपने स्वार्थ के चक्कर में अपने अंदर की इंसानियत को खत्म कर दिया है क्या गाव के और शहरों के लोगो की ग़रीबी मिट चुकी है क्या लोगों को दो वक्त का खाना चाहिये औ शिक्षा मिल रही है क्या विकलांगों की तकलीफे खत्म हो गयी क्या किसानों  की आत्म हत्या थम गयी है आज  देश को आझाद हुवे कुल 70  साल पूरे हुवे है।  पर आज भी देश मे इन समस्याओं का निराकरन नही हुआ है। तब भी देश मे ऐसी ही परिस्थिति थी और आज  भी वैसे की वैसी ही है। 

देश की सरकार डिजीटल इंडिया ओर स्मार्ट सीटी के झुटें सपने भोली जनता को दिखारही है। जो कीवास्तविक परिस्थिती से कुछ और ही है दोस्तो मेरी  इस पर लिखने की कोई मानसिकता नहीं थी। पर मैंने अपने देश में रोतेबिलगते जर्जर हालात मे जी रहे उन भिखारी ओर अपाहिज लोगों के बच्चो को उन  स्मार्ट सीटी मे  देखा है। गरीब लोगो की हालात देख कर ऐसा लगता है कीआज स्मार्ट सीटी और डिजिटल इंडिया का अभियान कूछ काम का ही नही है। दोस्तों गरिब और मंजदुर लोगो को दो वक्त की रोटी रहने को मकान और अच्छी शिक्षा मिल जाय इतना ही काफी है।
                                     
सरकार की डिजिट इंडिया की  निति सब झुट है जिसकी सच्चाई आप अपने जीतीजागती जींदगी मे खुद देख रहे है। हाल ही में ओडिसा में एक आदमी के पास पैसे नहीं होने की वजह से अपनी मृत पत्नी का शव अपने कंधो पर उठाकर १२ किलो मीटर ले जा ना पड़ा है । तो वही इंदौर के रतनगढ़ के गाव में ही पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए लकड़िया खरीदने को पति के पास पैसे नहीं होने की वजह से  समशान में उसे लकड़िया नहीं दी गई। मजबूरन इस गरीब को अपने पत्नी का अंतिम संस्कार कचरा जलाकर करना पड़ा है। यह खबर आप लोगो ने टीवी न्यूज चैनलो में अखबारों में देखी और पढ़ी ही होगी। जिससे पता चलता है की गरीब लोगो आज कैसे जी रहे है। यह दोनों घटना भारत की गरिबी मे जी रहे लोगो की सच्चाई पेश करती है। 
 आज देश को आझाद होने को कुल 70  साल जरूर पुरे  हुवे है। पर आज भी देश मे भुकमरीबेरोजगारी, जैसे अनगिनत समस्या से जनता को सामना करना पड़ रहा है। देश के युवाओ को रोजगार नहीं है। देशने शिक्षा क्षेत्र में जरूर क्रांती की है। पर ओ भी पुंजिपतियो के हित के लिये जिसका कोई फायदा ही नही. क्युकी आप को पता ही होगा की  एक इंजीनियर को निजी कॉलेज में कितनी  तनखा मिलती है जितनी बच्चे को स्टडी मटेरीयल होता हे ना बस उतनी।
आज भी देश मे लोगों की मुलभूत सुविधा के अभाव मे देशवासी जी रहे है। कपडा-रोटी ओर मकान यह भारत के हर नागरिकों का प्राथमिक अधिकार है। पर आज लोगो को दो वक्त की रोटी-छोड दो साहब पहनें के लिए कपड़ा ओर रहने के लिए ठींकठाक मकान भी नसीब नही हो रहा है। जिसके चलते हर भारतीय अपने जरुरोतों के लिए जो काम मिला वहकर रहे है। यह बात अशिक्षित लोग़ ही नही तो शिक्षीत बेरोजगार युवा भी करते नजर आ रहे है। आज आप देख सकते हो की, सरकारी नौकरी में कैसी मारा-मारी शुरू है। आजकी युवा पिढी का ज्यादा रुची सरकारी नौकरी पर ही होती है। इस की वजह आप को पताही है दोस्तों वास्तवीक्ता देखी जाय तो आज के युवाओ को ऐसी नौकरी नही करना चाहते पर बेरोजारी डर से और निजी कंपनी की पैसा बचाव लॉबी से तंगआकर लोग़ सरकारी नौकरी करना चाहते है। साथ ही हर व्यक्ति सुरक्षित झोन में रहना आज की परिस्थिती से उचित मानते है।
     आज हर स्मार्ट सीटी के तर्ज पर भाजप सरकार ने स्मार्ट सीटी का बिगुल फ़ूक दिया है और स्मार्ट सी टी के शहरों की सूची भी जाहिर की है। पर सरकार को यह नही दिखता की अपने स्मार्ट सीटी मे भी भिखारियो की संख्या कितनी बढी है।  नाही कोई इसविषय पर चर्चा करना चाहता है। नाही कोई इस पर बहस करता हे  क्युकी सब को पत्ता होता हे की " भिखारी नाही इस राज्यका होता हे" "ना उस राज्य का होता है" नाही उसका कोई युनियन होता है जिसके चलते राजनेतिक पार्टियों को उन लोगों का कोई फायदा नही होता. जिससे उनकी चिखे सुनने वालाभी कोई नही है ओर जो होता हे  तो सिर्फ रेलवे स्टेशन या गलीचौहारे पर बैठे भिकारियों को रुपये  या होगी उतनी भिक्षादेकर निकल जाता है  पर कोई ऐ नही सोचता की भारत को भिकारी मुक्त और बेरोजागारी मुक्त करना चाहिये
          
दोस्तो में आप को बता देता हू की कुछ ऐसी संस्था है। जो अपना समाज के प्रति दायित्व समझकर मंदत करने के लिए आगें आरही है। जिसमे नागपुर की उपाय संस्था फूट पाथ पार रहने वाले गरिब मजदुर पेशा लोगो के बच्चो  को पढा रही है। इस संस्था में जुड़े युवक और युवतियां हॉयर एजूकेशन के है। साथी ही  ऐसी अनगिनत संस्था है जो की अपना कोई स्वार्थ के बिना कार्य कर रही है। दोस्तो कभी आप ने रेलवे स्टेशन पर "अपाहिज लोगो को गाना गा कर अपनी भूक मिटाने के लिये लोगो की मदंत मांगते देखा होगा" तो कोई विकलांग और बुर्जुग लोगो कुछ चिजे बेचकर अपना गुजारा चलाते हुवे भी देखा होगा। और आप में से कोई लोगो उन्हें  मंदत भी की होगी। पर अभी मंदत नहीं तो इसकी जड़ खोजने का वक्त आ गया है। आज इन्ह  भिकारी और विकलांग लोगो  ज्यादा तादात स्मार्ट सिटी और मेट्रो सीटी मे ही है। दोस्तो आज अपन फिल्मी गानों के कार्यक्रम मे बेफसुल पैसा उडाते है पर कोई अंधा व्यक्ति गाना गाकर अपनी रोजी रोटी कमाता होगा तो उसे क्या देते हो ?
    हर नयी सरकार भारत मे बेरोजगारी,  किसान आत्म हत्या, भुकमरी  और गरिब जैसे मुद्दे को लेकर चुनकर आती है। पर जिसके बाद नाही यह समस्या का निराकर तो नहीं होतो भाईसाहब बल्कि उसमे व्रुद्धि जरूर होती है। देश मे हर राजनैतिक पार्टिया विकास की झूटी बाते जरूर करती है और जब चुन कर आने के बाद पूंजीपतियों का विकास और खुदका विकास पर ज्यादा ध्यान देता है। इस वास्तविक परिस्थिति पर जितना लिखेगे उतना कम ही है । क्यूकी देश में  पढ़े लिखे लोगो होते तो आज इस विषय पर जरूर बहस  होती ओर सरकार उत्तर देना होता।  साधार व्यक्ति आज अपनी समस्या से इतना घिरा पढ़ा हुआ है  की, उसकी इस विषय  पर आज बात करने की मनस्थिति नहीं रही  है। क्युकी उसकी वर्तमान की जिंदगी में काफी  समस्या रहती है। खेर आज मिडिया वालो को भी पैसो की स्टोरी होनी होती है। जिससे कंपनी को फायदा हो सके लेकिन हमारे  भिकारी, विकलांग भाईयों की और से कुछ नही मिलता जिससे यह विषय उन्हके लिये मामुली हो चुका है। जिससे पता चलता हे की आज गरिबी होना कितना  महापाप हो गया है...............
नितिन बिनेकर
मो. ९९७०४२०७३६  
( दोस्तों मैंने अपने विचार इस ग़रीबी महापाप इस  ब्लॉगर  पर अपने शंब्दों में रखे है।  इस विषय से किसी की  भावनाओं को ठेच पोह्ची होगी तो मुझे शमा करे / हां...... इस में कुछ गलतिया भी होगीतो  )